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मैं काफ़ि हूं ।

कभी कुछ सोचा भी तो मुझे जरूर बताना। मुझे जरुरी समझो ,या ना समझो अपनी सोच को मुझ तक जरूर पोहचाना। ये खाली दिमाग एक बार चल जायेगा, बस शैतानो वाले विचार इसमे आणे न देना। अकेला पण मेहसुस हुआ, तो जमाना है गुफ्तगु करणे पर अकेले छोड के जाओगे तो हम अकेले हो जायेंगे। ऐसा कोई सवाल नहीं, जिसका जवाब ना हो ऐसी कोई राह नहीं, जिसकी मंजिल ना हो तुम क्या सोचते हो, ये मेरे लिये एहेम हैं तुम इन्सान हो मैं इन्सान हू, मेरे लिये यही काफी हैं। चलो हम दोनो आज खुशी नहीं, दुख बाट के नई जिंदगी शूरु करते हैं। बस छोटी मुश्किल तो है, आज नहीं तो कल सुलझ जायेगी अकेला हू तो क्या कल पुरी दुनिया मेरी होगी। - ©प्रियंका पठाडे